चुनाव का दौर समाप्त हो ने को हैऔर उम्मीदवारों के सपनों के महल एक एक कर उभर रहें है,हर राजनैतिक दल अपने को ही विजयी के रूप में देख कर शेखचिल्ली का सा मजा ले रहा है.पर आम आदमी को अपने मत के अपात्र
दान की चिंता रह रह कर सता रही हैं . चाहे कोई भी चुनकर क्यों न आए जनता जनार्दन की सुननेवाला बस एक
भगवान् ही है .तेरी जय हो प्रभू .
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