Saturday, July 31, 2010

yachana

दुनिया से मतलब रखता जो
था उसका धरोहर तेरा अंश
उस पावन अंश से बिछुड़
पड़ा है यह पार्थिव देह
दुनियादारी के कदम उठाते
उस अंश सहित देह ने
भरा चिटठा कर्मोंका
जो आज तेरे सामने
खुलने को है तैयार
हे प्रभो!
सांस चलते
देह रखते
जो संभल न पाया
अब हाथ मसलता
रह गया 
तू दया का दाता
आज बन न्यायनिहन्ता 
मेरे बुरे करतूतों  को
नजरंदाज न करना
पर ऐसी सजा सुनाना
जिसे भुगतते
तेरा कभी साथ न छुटे
तेरी साया में
मेरा हर लम्हा
समा जाये 

Wednesday, July 28, 2010

दुनिया से रखता जो
था उसका धरोहर तेरा अंश
उस पावन अंश से बिछुड़
पड़ा है यह पार्थिव देह
दुनियादारी के कदम उठाते
उस अंशसहित देह ने
भरा चिठ्ठा कर्मोंका
जो आज तेरे सामने
खुलनेको है तैयार ,
हे प्रभो ,सांस चलते
देहा रखते
जो संभल न पाया
अब हाथ मसलता
रह गया !
तू दया का दाता
आज बन न्यायनिहन्ता
मेरे बुरे करतूतों को