दुनिया से मतलब रखता जो
था उसका धरोहर तेरा अंश
उस पावन अंश से बिछुड़
पड़ा है यह पार्थिव देह
दुनियादारी के कदम उठाते
उस अंश सहित देह ने
भरा चिटठा कर्मोंका
जो आज तेरे सामने
खुलने को है तैयार
हे प्रभो!
सांस चलते
देह रखते
जो संभल न पाया
अब हाथ मसलता
रह गया
तू दया का दाता
आज बन न्यायनिहन्ता
मेरे बुरे करतूतों को
नजरंदाज न करना
पर ऐसी सजा सुनाना
जिसे भुगतते
तेरा कभी साथ न छुटे
तेरी साया में
मेरा हर लम्हा
समा जाये
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