Wednesday, February 17, 2010

आश्वासन !

हे प्रभु !जीवन की क्षणिकता की पतीति मुझे करा दो
ताकि मेरे भीतर का विवेक पनप उठे .{90:12}
एक वही मेरा धाम औ सुरक्षा स्थान है
वह है मेरा भगवन और आस्थागार
उसके प्रति विश्वास ने
रात की अंधियारी में भयावह रोग की भीति
तथा दिन की उजयारी में विपत्तियों की चपेट से
मुझे भय मुक्त किया .
यदि प्रभु ही हमारा धाम बन जाए औ
अत्युन्नत परमपिता हमारा छाता
तो विपत्तियाँ पराजित होगी .
उस की करुणा से
कोई रोग निकट आनेका साहस नहीं करेगा
क्योंकि अपने हाथों से गिरते हुए हमें
अनायास झेलकर किंचित भी
जखमी होने से
वह बचाएगा ।
क्योंकि स्वयं भगवान् ने कहा कि
"जो मुझसे प्रेम करता है उसे बचाऊंगा ,
जो मुझमें विश्वास रखता है उसकी रक्षा करूंगा .