फूलों की खुशबू से महक उठा वह चमन
यादों की महक से खिल उठा यह मन
उस महक पर है बयार का शासन
इस महक पर है आत्मीयता का बंधन
मन चाहा,यादों का कारवां खिला लो
और तनहाई के पलों में सुगंध भर दो
यहाँ न कोई बाह्य बंधन और शासन
मन तो अपना है कर लो आपही नियंत्रण .
Sunday, May 24, 2009
Thursday, May 21, 2009
ఇది విదితమే !
ఎన్నికల ఫలితాలు చూసి సప్త సముద్రాల ఆవల నివసించే తెలుగు జాతికి ఆశ్చర్యం కలుగు నేమో గాని ,తెలుగు గడ్డపై
గాలిపిల్చుచున్న సామాన్యుడిని వచ్చిన ఫలితాలు సంభ్రమ పరుచ లేదు .ఎన్నికల రోజునే ఆతను ఇలా జరుగునని కేవలం ఉహించడమే కాదు కుండ బద్దలు కొట్టి చెప్పగలిగాడు. అవనీతిని జీర్ణించుకుని బ్రతక నేర్చిన మన ప్రజలు మార్పుని ఎలా అక్కున చేర్చ గలరు?మార్పు కోరే ఏకొద్దిమందో ఆరాటపడ్డారు ,తమ ఓటును సద్వినియోగం చేసారు
కానీ కడలి నీటిలో ఒక తెనేబొట్టు తీపిదాన్ని తేగలదా ?అలా అని మార్పు కోరే వాడు ప్రయత్నము మానుతాడా ? .మర్పు
రావాలి .అది ఒకరోజు వొస్తుంది.మనషి ఆశజీవి ,అందుకే బతకగల్గు చున్నాడు.చిరంజీవి పార్టీ చీలికను తెచ్చింది ,తెరాసా పార్టీ పోత్తంటూ పక్కన చేరింది..వచ్చిన ఫలితాన్ని అనుభవించక తప్పదు మరి !
గాలిపిల్చుచున్న సామాన్యుడిని వచ్చిన ఫలితాలు సంభ్రమ పరుచ లేదు .ఎన్నికల రోజునే ఆతను ఇలా జరుగునని కేవలం ఉహించడమే కాదు కుండ బద్దలు కొట్టి చెప్పగలిగాడు. అవనీతిని జీర్ణించుకుని బ్రతక నేర్చిన మన ప్రజలు మార్పుని ఎలా అక్కున చేర్చ గలరు?మార్పు కోరే ఏకొద్దిమందో ఆరాటపడ్డారు ,తమ ఓటును సద్వినియోగం చేసారు
కానీ కడలి నీటిలో ఒక తెనేబొట్టు తీపిదాన్ని తేగలదా ?అలా అని మార్పు కోరే వాడు ప్రయత్నము మానుతాడా ? .మర్పు
రావాలి .అది ఒకరోజు వొస్తుంది.మనషి ఆశజీవి ,అందుకే బతకగల్గు చున్నాడు.చిరంజీవి పార్టీ చీలికను తెచ్చింది ,తెరాసా పార్టీ పోత్తంటూ పక్కన చేరింది..వచ్చిన ఫలితాన్ని అనుభవించక తప్పదు మరి !
Sunday, May 10, 2009
अंतस
चल पड़े जीवन की डगर पर
गिनते मील पत्थरों की कतार
कुछ बिना गिने ही जुड़ गए
आरम्भ के पत्थर
बिना समझे बूझे
कर गए पार!
जब होश संभाला
तो पाया अंको ने किया
विंशति को पार .
आत्मा का पयन अनंत
वसंत शिशिर का यह अट्टहास ?
जीवन की सड़क पर
चलें मील पत्थर करते पार।
अंकों को जोड़ते जोड़ते
पहुंचे जब एक मुकाम
इस अस्थिपंजर साथी ने
मुंह फेर लिया
चलती राह में ,
पर मार्ग तय करना है.
मंजिल का पता नहीं
सड़क हैं सुनसान
मील पत्थर का
नहीं नामोनिशान ! !
उस दूर क्षितिज पर
आशा की एक
किरण
एक सुखद
आभास
आंस जग उठी
हौसला बढ़ा
उमंग पुलक उठी
सड़क नापने पग बढे
कुछ डगमगाते
कुछ संभले संभले
नये सीरेसे निकल पड़े
मील पत्थर नापने ।
पर..यह क्या ?
साँस फूलने लगी
नजर धुंधला गई
पग कांपने लगे
चिन्हित अंक धूमिल हुए
फिर भी चलना है
चलते रहना है
पगों की
कवायत को
जारी रखना है
क्योंकि,
मंजिल तक पहुँचना है
किंतु ?क्या वहां पहुँच
मंजिल कि पहचान होगी?
पता नहीं !
क्योंकि ,
पहचान का कोई चिन्ह
विरासत में हमें
मिला नहीं !!!
गिनते मील पत्थरों की कतार
कुछ बिना गिने ही जुड़ गए
आरम्भ के पत्थर
बिना समझे बूझे
कर गए पार!
जब होश संभाला
तो पाया अंको ने किया
विंशति को पार .
आत्मा का पयन अनंत
वसंत शिशिर का यह अट्टहास ?
जीवन की सड़क पर
चलें मील पत्थर करते पार।
अंकों को जोड़ते जोड़ते
पहुंचे जब एक मुकाम
इस अस्थिपंजर साथी ने
मुंह फेर लिया
चलती राह में ,
पर मार्ग तय करना है.
मंजिल का पता नहीं
सड़क हैं सुनसान
मील पत्थर का
नहीं नामोनिशान ! !
उस दूर क्षितिज पर
आशा की एक
किरण
एक सुखद
आभास
आंस जग उठी
हौसला बढ़ा
उमंग पुलक उठी
सड़क नापने पग बढे
कुछ डगमगाते
कुछ संभले संभले
नये सीरेसे निकल पड़े
मील पत्थर नापने ।
पर..यह क्या ?
साँस फूलने लगी
नजर धुंधला गई
पग कांपने लगे
चिन्हित अंक धूमिल हुए
फिर भी चलना है
चलते रहना है
पगों की
कवायत को
जारी रखना है
क्योंकि,
मंजिल तक पहुँचना है
किंतु ?क्या वहां पहुँच
मंजिल कि पहचान होगी?
पता नहीं !
क्योंकि ,
पहचान का कोई चिन्ह
विरासत में हमें
मिला नहीं !!!
Saturday, May 9, 2009
चुनाव का दौर समाप्त हो ने को हैऔर उम्मीदवारों के सपनों के महल एक एक कर उभर रहें है,हर राजनैतिक दल अपने को ही विजयी के रूप में देख कर शेखचिल्ली का सा मजा ले रहा है.पर आम आदमी को अपने मत के अपात्र
दान की चिंता रह रह कर सता रही हैं . चाहे कोई भी चुनकर क्यों न आए जनता जनार्दन की सुननेवाला बस एक
भगवान् ही है .तेरी जय हो प्रभू .
दान की चिंता रह रह कर सता रही हैं . चाहे कोई भी चुनकर क्यों न आए जनता जनार्दन की सुननेवाला बस एक
भगवान् ही है .तेरी जय हो प्रभू .
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